एमयू के स्टार्टअप्स को मिलेगा उद्योग का सहारा
मुंबई, मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) स्टार्टअप्स को अब उद्योग का सहारा मिलेगा। इसके लिए एमयू, डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड और हाइव (हाई इम्पैक्ट एंड इनोवेशन्स इकोसिस्टम) ने समझौता किया है। इसका उद्धेश्य छात्रों और संसोधकों के नए विचारों को असली कमर्शियल रूप मिल सके।
समझौते पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए गए। शुरुआती पहलों को साइन होने के 30 दिनों के अंदर तय करने की योजना है. हाइव इसमें कोऑर्डिनेशन का काम देखेगा। हालांकि किसी भी फंडिंग या निवेश के लिए अलग से मंजूरी लेनी होगी। इस अवसर पर वाइस चांसलर प्रो. रवींद्र डी. कुलकर्णी ने कहा कि रिसर्च को इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ना बहुत महत्वपूर्ण है। विचारों को हकीकत में बदलने के लिए इंडस्ट्री की भागीदारी जरूरी है। इस साझेदारी से विश्वविद्यालय में रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल में स्टार्टअप्स को इंडस्ट्री की समस्याओं पर प्रोजेक्ट दिए जाएंगे। उन्हें इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से मेंटरिंग, प्रोटोटाइप बनाने और टेक्निकल वैलिडेशन में मदद मिलेगी। साथ ही उन्हें संभावित निवेशकों से जोड़ा जाएगा।
कुलकर्णी के अनुसार निवेशक और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी के प्रतिनिधियों के साथ वर्कशॉप, प्रेजेंटेशन, इवेंट और सेमिनार कराने की संभावना भी तलाशी जाएगी। पर्यावरण बदलाव, सर्कुलर इकॉनमी, पानी और संसाधनों का सही इस्तेमाल और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी इस सहयोग के मुख्य क्षेत्र होंगे। अगले चरण में ऐसे प्रोजेक्ट चुने जाएंगे, जिनसे छात्र, शोधक, स्टार्टअप्स और माइक्रो, स्मॉल व मीडियम एंटरप्राइजेज यानी एमएसएमई को फायदा हो।















