काठमांडू,   नेपाल में हाल ही में संपन्न आम चुनावों में अभूतपूर्व लोकप्रियता के साथ बहुमत से सत्ता में आए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का संसदीय कार्यवाही से लगातार अनुपस्थित रहना अब देश की जनता को अखरने लगा है और इसे लेकर प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष डी पी आर्यल भी आलोचना के घेरे में आ गये हैं।

ताज़ा मुद्दा यह है कि संसद में बजट पेश किये जाने के दौरान भी उनकी उपस्थिति की पुष्टि नहीं की गई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण से लेकर अपनी ही सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने के कारण प्रधानमंत्री की देश में आलोचना की जा रही है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि विगत 11 मई से शुरू हुए बजट अधिवेशन के दौरान लगातार प्रधानमंत्री सदन में अनुपस्थित हैं। वह अब तक न तो संसदीय कार्यवाही में शामिल हुए हैं और न ही सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों पर चल रही चर्चा के दौरान सांसदों के प्रश्नाें का कोई उत्तर दिया है।

२९ मई को नेपाल का वार्षिक बजट पेश किए जाने की तालिका है। लेकिन बजट भाषण के दौरान भी प्रधानमंत्री शाह सदन में मौजूद रहेंगे या नहीं इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। बजट भाषण के दौरान उनकी उपस्थिति की सुनिश्चितता को लेकर अभी तक न तो प्रधानमंत्री का सचिवालय और न ही अध्यक्ष के तरफ से कोई स्पष्ट बात कही गई है।

प्रधानमंत्री शाह की मीडिया सलाहकार दीपा दहाल ने कहा कि बजट भाषण के दौरान प्रधानमंत्री की उपस्थिति को लेकर अभी समय तय नहीं किया गया है। दहाल ने कहा कि सामान्य रूप से बजट भाषण के दौरान प्रधानमंत्री की उपस्थिति होनी चाहिए लेकिन प्रधानमंत्री की समय तालिका में अभी तक संसद में रहने की बात उल्लेख नहीं है।

उधर स्पीकर के लगातार प्रयास के बाद भी प्रधानमंत्री की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित नहीं होने से उनकी भी आलोचना हो रही है। स्पीकर ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण और नीति तथा कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होने वाले प्रधानमंत्री को बजट भाषण के दौरान उनकी उपस्थिति का प्रयास किया जा रहा है। जबकि विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि प्रधानमंत्री की संसद में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अध्यक्ष ने अब तक कोई निर्देश क्यों जारी नहीं किया। संसदीय मामलों के विशेषज्ञ हरि बहादुर थापा ने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन के प्रति जवाबदेह बनाने में अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान संसदीय आचरण पहले की परंपराओं से अलग दिखाई दे रहा है।

सिंहदरबार स्थित संसद भवन से प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय कुछ ही मिनटों की दूरी पर होने के बावजूद, काम के दबाव का हवाला देते हुए शाह संसद में उपस्थित होने से बचते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वह अपने कार्यालय से ही संसदीय कार्यवाही का सीधा प्रसारण देखते हैं।