काठमांडू,   नेपाल के कृषि मंत्रालय ने किसानों को रासायनिक उर्वरक की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई और कड़ी व्यवस्था के साथ नई कार्यविधि लागू की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समय पर खाद की सप्लाई नहीं कर पाने और कालाबाजारी करने वालों का लाइसेंस रद्द किया जायेगा।

नेपाल की कृषि मंत्री गीता चौधरी ने 'अनुदानयुक्त उर्वरक वितरण व्यवस्थापन कार्यविधि' के दूसरे संशोधन को मंजूरी दी। इस कार्यविधि के लागू होने के बाद अब किसानों को रासायनिक उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराने तथा उर्वरक आपूर्ति और वितरण प्रणाली को व्यवस्थित, पारदर्शी और अधिक प्रभावकारी बनाने का दावा किया गया है। मंत्रालय का मानना है कि इस कार्यविधि को पूरी तरह लागू करने से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होगी, देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और समग्र आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

संविधान में व्यवस्था किए गए 'खाद्य सम्बन्धी अधिकार' को लागू करने में सहयोग देने के उद्देश्य से लाई गई इस विस्तृत कार्यविधि से उर्वरक कोटा निर्धारण से लेकर किसानों के खेत तक पहुंचने वाली पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में होगी। अब सरकार लागत साझेदारी के आधार पर किसानों को अनुदान में उर्वरक उपलब्ध कराएगी। बजट की सुनिश्चितता अर्थ मंत्रालय करेगा, जबकि कृषि मंत्रालय मांग और खपत की स्थिति को देखते हुए वार्षिक कोटा तय करेगा।

उर्वरक वितरण प्रणाली को वैज्ञानिक बनाने के लिए मंत्रालय ने कोटा निर्धारण के लिए स्पष्ट और गणितीय आधार तय किया है। इसके अनुसार कुल अनुदानयुक्त उर्वरक में खेती योग्य भूमि को 20 प्रतिशत, फसल सघनता को 10 प्रतिशत, सिंचाई उपलब्धता को 20 प्रतिशत, पिछले पांच वर्षों की उर्वरक उपयोग स्थिति को 20 प्रतिशत, मांग की मात्रा को 20 प्रतिशत और व्यावसायिक फसलों के क्षेत्रफल को 10 प्रतिशत भार देकर स्थानीय तह तक कोटा वितरण किया जाएगा।

संभावित कमी से बचने के लिए कुल वार्षिक उर्वरक मात्रा का 10 प्रतिशत हिस्सा वितरक कंपनियों को अनिवार्य रूप से 'बफर स्टॉक' के रूप में रखना होगा। यह उर्वरक खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण धान, मक्का और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों तथा बीज उत्पादन के लिए आपातकालीन स्थिति में उपयोग किया जाएगा। उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने आयात बिंदु पर ही उर्वरक की कीमत तय कर दी है। अनुदान वाली उर्वरक की आयात कीमत यूरिया के लिए 14 रुपये प्रति किलो, डीएपी के लिए 43 रुपये प्रति किलो और पोटाश के लिए 31 रुपये प्रति किलो निर्धारित की गई है।

अंतिम उपभोक्ता मूल्य तय करते समय इस कीमत में केवल स्थानीय समिति तय परिवहन दर और विक्रेता के संचालन तथा प्रबंधन खर्च के रूप में अधिकतम 1 रुपया प्रति किलो ही जोड़ सकेंगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कार्यविधि में स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय तह को बिक्री मूल्य की सूची अपने कार्यालय और विक्रेता के बिक्री केंद्र पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी। उर्वरक वितरण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्थानीय कृषि सहकारी संस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी। सहकारी संस्था न होने पर ही अन्य फर्म या कंपनियों को विक्रेता नियुक्त किया जाएगा।

विक्रेता नियुक्ति के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, लेखा परीक्षण प्रतिवेदन, पैन नंबर, गोदामघर तथा नापतौल मशीन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।कृषि मंत्री चौधरी ने स्पष्ट किया है कि तय मानक के आधार पर किसानों को तय समय के भीतर खाद की उपलब्धता नहीं कराने पर वितरक का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई भी वितरक खाद की कालाबाजारी में संलिप्त पाया जाता है, तो उनका भी लाइसेंस रद्द किया जाएगा।