लाहौर (पाकिस्तान),   जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने विदेशी कर्जदाताओं पर पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देश ने अपनी आर्थिक नींव बाहरी कर्ज पर खड़ी की है। रहमान ने कहा, "औपनिवेशिक शासन खत्म हो गया है, लेकिन आज हमारे देश के लिए फैसले अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं करती हैं।" उन्होंने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए गए कर्ज पर पाकिस्तान की निर्भरता का जिक्र किया।

द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक नेता ने लाहौर के वहदत रोड क्रिकेट ग्राउंड में 'खत्म-ए-नबुव्वत' सम्मेलन में पाकिस्तान की हुकूमत को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "अगर वे हमारी आर्थिक नीतियां तय करते हैं, तो यह उपनिवेशवाद का ही एक और रूप है।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यहां के लोगों का है और एक मजबूत देश के लिए शांति और जन-सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय देश "लगातार बंटवारे" का सामना कर रहा है।

उन्होंने मुस्लिम दुनिया को बांटने वाली ताकतों पर भी आरोप लगाया और कहा कि जमीयत पाकिस्तान के गरीबों को सम्मानजनक जीवन देना चाहती है। उन्होंने कहा, "अमीर और दमनकारी राजनीति नहीं चलेगी।" उन्होंने कहा कि लोगों पर अपनी ताकत थोपने वाली राजनीति भी नाकाम रहेगी। रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों को रद करने की कोशिश करने वाले सभी कदमों का विरोध करेगी।

उन्होंने नए प्रांत बनाने के किसी भी कदम से पहले राजनीतिक बहस की मांग की है। धार्मिक नेता ने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव थोपने के खिलाफ चेतावनी दी और तर्क दिया कि लगातार बनी नीतियों ने देश की राजनीतिक और आर्थिक नींव को कमजोर किया है। जमीयत प्रमुख ने कहा कि छह सितंबर, 1965 का दिन पाकिस्तान की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा के लिहाज से एक अहम घटना थी। उन्होंने कहा कि देश तभी मजबूत हो सकता है जब उसके लोग सुरक्षित और सम्मानित हों। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक बंटवारे ने देश को कमजोर किया है।

उन्होंने कहा, "हम प्रांतों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन समय और हालात पर भी विचार किया जाना चाहिए।" फजलुर ने कहा कि 18वें संशोधन के तहत खनिज संसाधनों पर प्रांतों का नियंत्रण है और राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर चर्चा में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा, "कोई भी फैसला एकतरफा न थोपा जाए। इस पर बहस होनी चाहिए।"

जमीयत नेता ने प्रमुख राजनीतिक दलों की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने इस मुद्दे पर सिर्फ सिंध के संदर्भ में बात की, जबकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज खामोश रही। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक बंटवारे पर पाकिस्तान की एक संयुक्त राष्ट्रीय पहचान विकसित न कर पाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश 'दो-राष्ट्र सिद्धांत' के आधार पर एक राष्ट्र बनाने में विफल रहा है और जातीय बंटवारे से प्रेरित हिंसा का गवाह बना है।