बंगाल की संस्कृति बचाने का लिया संकल्प : शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता, पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने
बुधवार को राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने
आरोप लगाया कि राज्य में “अरबी संस्कृति” थोपने का प्रयास किया जा रहा है,
जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बंगाल को “बंगाली हिंदुओं की मातृभूमि” के
रूप में सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
बंगाली नववर्ष पोईला
वैशाख के अवसर पर ‘मातृ शक्ति भरोसा कार्ड’ के शुभारंभ कार्यक्रम में बोलते
हुए अधिकारी ने कहा कि वर्तमान सरकार राज्य की सनातन परंपरा को व्यवस्थित
रूप से कमजोर कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में उर्दू
भाषा और महिलाओं को पर्दे में रखने वाली संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश
हो रही है। अधिकारी ने कहा कि यह स्वामी विवेकानंद और श्री चैतन्य महाप्रभु
की भूमि पर सीधा आघात है।
अधिकारी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की
विरासत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों के कारण ही 1947 में
पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा। उन्होंने कहा कि मुहम्मद अली जिन्ना
इस भूमि को पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे, लेकिन मुखर्जी और स्वामी
प्रणवानंद महाराज के प्रयासों से यह भारत में ही रहा।
उन्होंने कहा
कि नए वर्ष के अवसर पर पार्टी संकल्प लेती है कि बंगाली हिंदुओं की इस
मातृभूमि की रक्षा की जाएगी और माताओं-बहनों के खिलाफ ‘लव जिहाद’ जैसी
घटनाओं को स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा।
भाजपा के ‘संकल्प पत्र’
का उल्लेख करते हुए अधिकारी ने इसे विश्वास का दस्तावेज बताते हुए कहा कि
इसका उद्देश्य बंगाल को फिर से देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में
स्थापित करना है।
उन्होंने बताया कि ‘मातृ शक्ति भरोसा कार्ड’ को
राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की गारंटी के रूप में पेश किया
जा रहा है, जो तृणमूल सरकार की मौजूदा सामाजिक कल्याण योजनाओं का विकल्प
बनेगा।
अधिकारी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “गारंटी”
का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके नेतृत्व में क्षेत्र की आध्यात्मिक और
सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने
दक्षिणेश्वर काली मंदिर और कालीघाट काली मंदिर की आध्यात्मिक परंपरा का भी
जिक्र किया।















