दृष्टिबाधित शतरंज खिलाड़ियों की राज्य चयन प्रतियोगिता का समापन, 120 खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम
कोलकाता, दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को शतरंज के क्षेत्र में अपनी
प्रतिभा साबित करने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर देने के
उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ऑल बंगाल चेस सिलेक्शन चैंपियनशिप फॉर द
विजुअली चैलेंज्ड का रविवार को बनहुगली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर
लोकोमोटर डिसएबिलिटीज (एनआईएलडी) के सभागार में उत्साहपूर्ण माहौल में
समापन हुआ। सक्षम दक्षिणबंग, वेस्ट बंगाल चेस एसोसिएशन और क्रीड़ा भारती के
सहयोग से आयोजित इस चयन प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से
कुल 120 दृष्टिबाधित शतरंज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इनमें लड़के और
लड़कियां दोनों शामिल रहे।
इस प्रतियोगिता के प्रदर्शन के आधार पर
आगामी राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता के लिए पश्चिम बंगाल की टीम का चयन किया
जाएगा। तीन दिनों तक खिलाड़ियों ने अपनी शतरंज प्रतिभा, एकाग्रता और
रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का शुभारंभ 28 अगस्त
को हुआ। उद्घाटन समारोह में पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी
मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती, प्रांत प्रचारक श्री प्रशांत भट्ट, क्षेत्रीय
संघचालक डॉ. जयंत रॉय चौधरी, प्रांत संघचालक शारदा प्रसाद पाल तथा भारत
के दूसरे ग्रैंडमास्टर और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित दिव्येंदु बरुआ सहित
कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
प्रतियोगिता के दूसरे दिन 29 अगस्त की
शाम को दिव्यांग बच्चों और युवाओं की ओर से विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजित किया गया। दिनभर शतरंज मुकाबलों के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में
दृष्टिबाधित प्रतिभागियों ने गीत, कविता पाठ और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं।
उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और यह संदेश दिया कि
शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा और आत्मविश्वास के रास्ते में बाधा नहीं बन
सकतीं।
तीसरे दिन 30 अगस्त को समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह
आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री
सारद्वत मुखर्जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा सक्षम के
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दयाल सिंह पवार, संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील पद
गोस्वामी, शशांक शेखर डे और रमेश सरोगी सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम
की अध्यक्षता सक्षम दक्षिणबंग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद ब्रह्म ने की। अपने
अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए
कहा, “इस 64 खाने की बिसात ने हमें सिखाया है कि दृष्टि आंखों में नहीं,
बल्कि मन में होती है।” उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी
खिलाड़ियों की सराहना करते हुए उनके प्रयासों को प्रेरणादायक बताया।
समापन
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार,
प्रमाणपत्र और पदक प्रदान किए गए। साथ ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के
लिए चयनित होने वाले पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।
आयोजकों
ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल विजेता तैयार करना
नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को समान अवसर, सम्मान और अपनी क्षमता
साबित करने के लिए मजबूत मंच उपलब्ध कराना है। प्रतियोगिता के माध्यम से
खिलाड़ियों को राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता भी मिला है।
पुरस्कार
वितरण समारोह और धन्यवाद ज्ञापन के साथ तीन दिवसीय चयन प्रतियोगिता का
समापन हुआ। आयोजकों ने प्रतियोगिता को सफल बनाने में एनआईएलडी प्रबंधन,
निर्णायकों और सभी स्वयंसेवकों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।















