झाड़ग्राम,  अवैध लकड़ी के कारोबार और नियमों की अनदेखी कर आरा मिल चलाने के आरोप में शनिवार को वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने झाड़ग्राम जिले के सांकराइल प्रखंड के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की। इस दौरान 12 स्थानों पर देर रात तक जांच अभियान चलाया गया। अवैध आरा मिलों को सील कर संचालकों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया।

खड़गपुर वन प्रभाग के कलाइकुंडा परिक्षेत्र की पहल पर सांकराइल थाने की पुलिस के सहयोग से यह संयुक्त अभियान चलाया गया। अभियान में जिला पुलिस की पुलिस उपाधीक्षक (डीएनटी) श्रेया सरकार, कलाइकुंडा परिक्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी प्रणय सरकार, सांकराइल थाना प्रभारी सौमेन सिन्हा महापात्र सहित वन विभाग और पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

रविवार सुबह "हिंदुस्थान समाचार" से बातचीत में कलाइकुंडा परिक्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी प्रणय सरकार ने बताया कि वन परिक्षेत्र में 12 स्थानों पर छापेमारी की गई है। उन्होंने कहा कि कुलटिकरी, रोहिणी, रामपुरा, गड़धरा, मादार, लालदहो और कुपड़ाकूपी जैसे स्थानों पर कार्रवाई की गई है। सभी संबंधित स्थानों पर बंद करने संबंधी नोटिस भेजे गए हैं।

उन्होंने बताया कि छापेमारी की खबर पाकर कई आरा मिलों के कर्मचारी मौके से भाग गए। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक वहां काम करने वाले कई लोग फरार हो चुके थे।

अभियान के दौरान आरा मिलों के वैध कागजात और उसके नवीनीकरण, भंडारित लकड़ी की वैधता तथा लकड़ी पर सरकारी मुहर या चिह्न की जांच की गई। इसके अलावा चिरी हुई लकड़ी के परिवहन में इस्तेमाल होने वाली ठेलागाड़ी और उससे संबंधित वैध कागजात भी देखे गए। अधिकारियों ने यह भी जांच की कि लकड़ी के परिवहन में सरकारी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

प्रणय सरकार ने बताया कि अभी सांकराइल क्षेत्र में छह और स्थान ऐसे हैं, जहां छापेमारी की जानी बाकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही उन स्थानों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध लकड़ी के कारोबार के खिलाफ नियमित रूप से छापेमारी और निगरानी अभियान चलाया जाएगा।

वन क्षेत्राधिकारी ने क्षेत्र में हाथियों की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल कलाइकुंडा क्षेत्र में कोई हाथी नहीं है। हालांकि पश्चिम मेदिनीपुर वन प्रभाग में वर्तमान में कुल 147 हाथी हैं।

प्रणय सरकार ने बताया कि अप्रैल से अगस्त तक हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हुए परिवारों को अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि यह राशि अनुमानतः 10 लाख रुपये तक हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि हाथियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाले सेवकों के वेतन के भुगतान में भी कठिनाई आ रही है। इन समस्याओं के बीच वन विभाग के कर्मचारी अपना कार्य जारी रखे हुए हैं।