पश्चिम बंगाल में स्कूल प्रबंधन समितियों के लिए चुनाव कराने की तैयारी, राजनीतिक प्रभाव कम करने पर जोर
कोलकाता, पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार राज्य संचालित स्कूलों की
प्रबंधन समितियों में राजनीतिक प्रभाव कम करने के उद्देश्य से नई व्यवस्था
लागू करने की तैयारी कर रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार
प्रारूप के अनुसार अब स्कूलों की गवर्निंग बॉडी के सदस्यों का चयन नामांकन
के बजाय चुनाव के माध्यम से किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों
के मुताबिक, पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान गवर्निंग बॉडी के
सदस्यों का चयन किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
नई
रूपरेखा के तहत केवल सचिव पद को चुनाव से बाहर रखा जाएगा। यह पद संबंधित
स्कूल के प्रधानाध्यापक या प्रधानाध्यापिका के पास स्वतः रहेगा।
प्रस्तावित
नियमों के अनुसार, गवर्निंग बॉडी के 70 प्रतिशत से अधिक पद छात्रों के
अभिभावकों के लिए आरक्षित रहेंगे। वहीं, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद भी
अभिभावकों के लिए ही आरक्षित होंगे। शेष 30 प्रतिशत पद स्थानीय शिक्षाविदों
को दिए जाएंगे।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक
गवर्निंग बॉडी में दो स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया
जाएगा, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले गवर्निंग बॉडी का सदस्य चुना जाना
अनिवार्य होगा।
सरकार गवर्निंग बॉडी के सदस्यों की संख्या भी निर्धारित करने जा रही है।
प्रस्ताव
के मुताबिक प्राथमिक विद्यालयों में अधिकतम 15 सदस्य, माध्यमिक विद्यालयों
में 20 सदस्य और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 25 सदस्य होंगे।
नई
व्यवस्था में गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल दो वर्ष से अधिक रखा जाएगा। साथ
ही, एक कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्य अगले कार्यकाल के चुनाव में हिस्सा
नहीं ले सकेंगे। हालांकि यह नियम सचिव पद पर लागू नहीं होगा। शिक्षक
संगठनों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।















