नई दिल्ली: क्या मंगल ग्रह पर आज भी जीवन मौजूद हो सकता है? क्या लाल ग्रह की सतह के नीचे ऐसे वातावरण मौजूद हैं, जहां सूक्ष्मजीव जीवित रह सकते हैं? वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने इन सवालों को फिर से चर्चा में ला दिया है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ExoMars Trace Gas Orbiter (TGO) ने मंगल ग्रह के विशाल ज्वालामुखी अल्बा मॉन्स (Alba Mons) के आसपास हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का संभावित संकेत दर्ज किया है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गैस मंगल की सतह के नीचे मौजूद गर्म मैग्मा से निकल रही हो सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो वहां धरती के समुद्रों में पाए जाने वाले हाइड्रोथर्मल वेंट्स जैसा वातावरण मौजूद हो सकता है। पृथ्वी पर ऐसे वातावरण को जीवन की उत्पत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण संभावित स्थानों में माना जाता है।

इस अध्ययन के सह-लेखक डैनियल मेज ने उम्मीद जताई है कि यदि वहां लंबे समय तक जीवन के अनुकूल परिस्थितियां बनी रही हों, तो संभव है कि जीवित सूक्ष्मजीव अभी भी हमारी खोज का इंतजार कर रहे हों। हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह खोज मंगल पर जीवन होने का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।

मंगल के अल्बा मॉन्स क्षेत्र में क्या मिला?

वैज्ञानिकों की यह खोज मंगल के अल्बा मॉन्स ज्वालामुखी क्षेत्र से जुड़ी है। यह ग्रह की सतह के हिसाब से सबसे बड़े ज्वालामुखियों में से एक है। वहीं, मंगल का ओलंपस मॉन्स अपनी ऊंचाई के कारण सौरमंडल का सबसे विशाल ज्वालामुखी माना जाता है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ExoMars Trace Gas Orbiter ने अल्बा मॉन्स के आसपास मौजूद दरारों के ऊपर वायुमंडल में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का संभावित संकेत दर्ज किया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह गैस मंगल की सतह के नीचे मौजूद गर्म मैग्मा से निकलकर दरारों के रास्ते वातावरण में पहुंच रही हो सकती है। इससे संकेत मिलता है कि मंगल को पूरी तरह भूगर्भीय रूप से निष्क्रिय ग्रह मानना सही नहीं होगा।

यह अध्ययन 4 नवंबर 2026 को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Science Advances में प्रकाशित हुआ।

हाइड्रोजन क्लोराइड गैस से कैसे मिला ज्वालामुखीय गतिविधि का संकेत?

हाइड्रोजन क्लोराइड एक गैस है, जिसमें हाइड्रोजन और क्लोरीन होते हैं। मंगल के वातावरण में इस गैस की मौजूदगी पहली बार 2021 में ExoMars Trace Gas Orbiter के माध्यम से दर्ज की गई थी।

शुरुआत में वैज्ञानिक इसे ज्वालामुखीय गतिविधि से जोड़ने को लेकर आश्वस्त नहीं थे। इसकी वजह यह थी कि गैस का वितरण किसी खास ज्वालामुखीय क्षेत्र तक सीमित नहीं दिख रहा था। इसके अलावा, अन्य सामान्य ज्वालामुखीय गैसों के स्पष्ट संकेत भी नहीं मिले थे।

लेकिन बाद के वर्षों में वैज्ञानिकों ने कुछ असामान्य बदलाव देखे। गैस केवल दक्षिणी गोलार्ध के गर्म मौसम में ही नहीं, बल्कि उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में भी दिखाई दी।

इसके बाद शोधकर्ताओं ने विशेष अभियान चलाकर करीब दो मंगल वर्षों तक उस क्षेत्र का अध्ययन किया। चूंकि मंगल का एक वर्ष पृथ्वी के लगभग दो वर्षों के बराबर होता है, इसलिए यह अभियान करीब चार पृथ्वी वर्षों तक चला।

इस दौरान वैज्ञानिकों को एक स्पष्ट लेकिन अस्थायी गैस संकेत मिला, जो कुछ समय बाद कम होकर अंतरिक्ष यान की पहचान करने की सीमा से नीचे चला गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह पैटर्न सामान्य वायुमंडलीय रासायनिक प्रक्रिया के बजाय जमीन के भीतर से गैस के अचानक बाहर निकलने जैसा प्रतीत होता है।

क्या मंगल की सतह के नीचे आज भी मौजूद है मैग्मा?

इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मंगल के अंदरूनी हिस्से में संभावित भूगर्भीय गतिविधि से जुड़ा है।

लंबे समय से मंगल को ऐसा ग्रह माना जाता रहा है, जहां ज्वालामुखीय गतिविधियां मुख्य रूप से प्राचीन काल में होती थीं। हालांकि, हाल के वर्षों में मिले कुछ संकेतों ने इस धारणा पर नए सवाल खड़े किए हैं।

NASA के InSight लैंडर ने भूकंपीय आंकड़ों और वैज्ञानिक मॉडलों के आधार पर मंगल की सतह के नीचे मैग्मा की संभावित मौजूदगी के संकेत दिए थे। अब ExoMars Trace Gas Orbiter के वायुमंडलीय अवलोकन इस संभावना को समर्थन दे सकते हैं।

शोध के प्रमुख लेखक अलेक्जेंडर ट्रोखिमोव्स्की के अनुसार, यह अध्ययन मंगल के भीतर मौजूद मैग्मा प्रणाली से गैस निकलने का एक स्वतंत्र और पूरक प्रमाण प्रस्तुत कर सकता है।

हालांकि, वैज्ञानिक अभी इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि अल्बा मॉन्स के नीचे वास्तव में सक्रिय मैग्मा मौजूद है या नहीं। इसके लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

हाइड्रोथर्मल वेंट्स क्या होते हैं और जीवन के लिए क्यों हैं महत्वपूर्ण?

हाइड्रोथर्मल वेंट्स समुद्र की गहराई में मौजूद ऐसी संरचनाएं होती हैं, जहां पृथ्वी के अंदर से गर्म पानी और खनिज बाहर निकलते हैं। ये आमतौर पर समुद्र तल में मौजूद दरारों और ज्वालामुखीय क्षेत्रों के आसपास पाए जाते हैं।

इन स्थानों पर सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती, फिर भी वहां अनेक प्रकार के सूक्ष्मजीव और जीव-जंतु पाए जाते हैं। इसका कारण है कि वहां मौजूद रासायनिक पदार्थों और ऊर्जा के सहारे कुछ सूक्ष्मजीव अपना जीवन चक्र चला सकते हैं।

वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत से जुड़े शुरुआती वातावरण में भी ऐसे हाइड्रोथर्मल क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।

मंगल पर यदि सतह के नीचे गर्म मैग्मा और पानी का संपर्क होता है, तो वहां भी इसी तरह की परिस्थितियां बन सकती हैं। ऐसे वातावरण में ताप, खनिज और रासायनिक ऊर्जा सूक्ष्मजीवों के अस्तित्व के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं।

यही वजह है कि वैज्ञानिक मंगल के संभावित हाइड्रोथर्मल क्षेत्रों को जीवन की खोज के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने पहले भी मंगल पर खोजे थे प्राचीन समुद्री हाइड्रोथर्मल क्षेत्र

मंगल पर हाइड्रोथर्मल वातावरण की संभावना पूरी तरह नई नहीं है। वर्ष 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन में NASA के Mars Reconnaissance Orbiter के आंकड़ों के आधार पर एरिडानिया बेसिन (Eridania Basin) में प्राचीन समुद्री तल पर हाइड्रोथर्मल गतिविधि के संकेत मिले थे।

शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया था कि लगभग 3.7 से 3.8 अरब वर्ष पहले इस क्षेत्र में एक विशाल जलाशय या समुद्र मौजूद रहा होगा। ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण गर्म, खनिजों से भरपूर पानी समुद्र के तल में प्रवेश करता रहा होगा।

यह वातावरण पृथ्वी पर जीवन की शुरुआती परिस्थितियों से मिलता-जुलता हो सकता था। हालांकि, यह अध्ययन प्राचीन मंगल के वातावरण से जुड़ा था, जबकि नवंबर 2026 का नया शोध अल्बा मॉन्स क्षेत्र में संभावित वर्तमान भूगर्भीय गतिविधि की ओर संकेत करता है।

क्या मंगल पर अभी भी जीवित हैं सूक्ष्मजीव?

यही इस खोज का सबसे रोमांचक सवाल है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मंगल की सतह के नीचे गर्मी, पानी और आवश्यक रासायनिक तत्वों का मेल मौजूद है, तो वहां सूक्ष्मजीवों के जीवित रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सतह के नीचे मौजूद वातावरण मंगल की कठोर परिस्थितियों से कुछ हद तक सुरक्षा भी दे सकता है। मंगल की सतह पर अत्यधिक ठंड, तेज विकिरण और कम वायुमंडलीय दबाव जीवन के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। लेकिन जमीन के भीतर मौजूद संभावित जलयुक्त क्षेत्र इन परिस्थितियों से बेहतर सुरक्षा दे सकते हैं।

हालांकि, किसी वातावरण का जीवन के अनुकूल होना और वहां वास्तव में जीवन मौजूद होना दो अलग-अलग बातें हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, जीवन की उत्पत्ति के लिए ऐसे अनुकूल हालात का लाखों वर्षों तक स्थिर रहना जरूरी हो सकता है। अल्बा मॉन्स क्षेत्र में इतने लंबे समय तक स्थिर परिस्थितियां रही हैं या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

सह-लेखक डैनियल मेज ने इसी संदर्भ में कहा कि यदि जीवन के लिए आवश्यक शर्तें स्थानीय स्तर पर पूरी होती हैं, तो संभव है कि वहां जीवित जीव हमारी खोज का इंतजार कर रहे हों।

क्या यह मंगल पर जीवन मिलने का प्रमाण है?

फिलहाल इसका जवाब नहीं है। वैज्ञानिकों ने मंगल पर किसी जीवित सूक्ष्मजीव, बैक्टीरिया या अन्य जैविक संरचना की खोज नहीं की है।

नई रिसर्च में मुख्य रूप से हाइड्रोजन क्लोराइड गैस के संभावित उत्सर्जन और उसके ज्वालामुखीय स्रोत की जांच की गई है। इसके आधार पर सतह के नीचे मैग्मा और संभावित हाइड्रोथर्मल वातावरण की परिकल्पना सामने आई है।

इसलिए इसे मंगल पर जीवन मिलने की घोषणा के बजाय जीवन की खोज के लिए एक नए संभावित क्षेत्र की पहचान के रूप में देखना चाहिए।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

यह खोज भविष्य में मंगल पर भेजे जाने वाले रोबोटिक मिशनों और वैज्ञानिक उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। अब शोधकर्ता अल्बा मॉन्स के आसपास मौजूद दरारों, गैस उत्सर्जन वाले क्षेत्रों और सतह के नीचे की संभावित संरचनाओं का अधिक बारीकी से अध्ययन करना चाहेंगे।

भविष्य के मिशनों में ऐसे उपकरणों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो मिट्टी और चट्टानों में जैविक अणुओं, खनिजों तथा पानी के संकेतों की पहचान कर सकें।

यदि इन क्षेत्रों में जीवन के अनुकूल परिस्थितियों की पुष्टि होती है, तो मंगल पर सूक्ष्मजीवों के संभावित अस्तित्व की खोज को नई दिशा मिल सकती है।

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