रांची: झारखंड में छात्राओं को शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के तहत अब छात्राओं के कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और करियर निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्राओं को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है।

राज्य के 970 सरकारी स्कूलों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम से 2.4 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हैं। इनमें लगभग 60 प्रतिशत छात्राओं की भागीदारी बताई जा रही है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य की बेटियां भी तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के प्रति तेजी से रुचि दिखा रही हैं।

तकनीकी प्रशिक्षण से मजबूत होगा भविष्य

व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से छात्राओं को आईटी, स्वास्थ्य सेवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मीडिया, पर्यटन, कृषि, रिटेल और अन्य रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है। इससे उन्हें अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

इस पहल का मकसद छात्राओं को स्कूल स्तर से ही आधुनिक तकनीक और कार्यस्थल की जरूरतों से परिचित कराना है, ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें रोजगार तलाशने में आसानी हो।

उद्योगों से जुड़ेंगी छात्राएं, मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

छात्राओं को केवल कक्षा में प्रशिक्षण देने के बजाय वास्तविक कार्यस्थलों से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए उद्योगों और विभिन्न संस्थानों के साथ साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इसके तहत ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT), करियर काउंसलिंग, उद्योग भ्रमण और अप्रेंटिसशिप जैसे अवसरों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे छात्राओं को कामकाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और अपनी क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को मिलेगा लाभ

झारखंड के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं के लिए व्यावसायिक शिक्षा विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है। आर्थिक परिस्थितियों और सीमित अवसरों के कारण कई बार प्रतिभाशाली बेटियों को आगे बढ़ने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता है।

स्कूल स्तर पर ही कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध होने से ऐसी छात्राओं को अपने भविष्य के लिए नए विकल्प तलाशने का अवसर मिलेगा। वे आगे तकनीकी शिक्षा, नौकरी, अप्रेंटिसशिप या स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगी।

आत्मनिर्भर झारखंड की दिशा में अहम कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए शिक्षा के साथ कौशल विकास बेहद जरूरी है। छात्राओं को बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र और रोजगार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

झारखंड में व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने की यह पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब चुनौती यह होगी कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली छात्राओं को वास्तविक रोजगार, अप्रेंटिसशिप और स्वरोजगार के अवसरों से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए।

बेटियों को हुनरमंद बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की यह पहल झारखंड में कौशल आधारित शिक्षा को नई दिशा दे सकती है।

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