ट्रेजरी घोटाले की आरोपी अन्नू पांडे को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 3.15 करोड़ की कथित हेराफेरी में अग्रिम जमानत याचिका खारिज
रांची / झारखंड : झारखंड के बहुचर्चित बोकारो ट्रेजरी घोटाले में आरोपी अन्नू पांडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सरकारी खजाने से 3.15 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध निकासी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें अन्नू पांडे को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को कानूनी राहत का एक रास्ता भी दिया है। अदालत ने कहा है कि अन्नू पांडे तीन सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत में पेश होकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं। इस आवेदन पर निचली अदालत मामले के गुण-दोष के आधार पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगी। यह मामला सीआईडी केस संख्या 06/2026 से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि बोकारो ट्रेजरी में पुलिस विभाग के सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के वेतन मद से लगभग 20 महीने की अवधि में 3.15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अवैध तरीके से निकाली गई। जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी खजाने से निकाली गई इस रकम को एक बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया था। यह बैंक खाता अन्नू पांडे के नाम पर खोले जाने की बात जांच में सामने आई है। अन्नू पांडे, कौशल कुमार पांडे की पत्नी हैं। सीआईडी इस पूरे वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि सरकारी राशि किस प्रक्रिया से निकाली गई, किसके निर्देश पर बैंक खाते में भेजी गई और इस रकम का इस्तेमाल किन लोगों ने किया। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अन्नू पांडे की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनका कथित घोटाले से कोई सीधा संबंध नहीं है। बचाव पक्ष के अनुसार, उनके पति कौशल कुमार पांडे ने उनके नाम पर बैंक खाता खुलवाया था और कथित वित्तीय गड़बड़ी में पति की भूमिका थी। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि बैंक खाते का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सक्रिय भूमिका के बिना किया गया। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा कि अन्नू पांडे नवजात शिशु की मां हैं। इसी आधार पर उन्हें अग्रिम जमानत देने की मांग की गई थी। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से अन्नू पांडे की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि आरोपी महिला अपने पति के साथ मिलकर संबंधित बैंक खाते का संचालन कर रही थीं। सरकार की ओर से कहा गया कि सरकारी खजाने से अवैध रूप से निकाली गई 3.15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे इसी बैंक खाते में जमा हुई थी। इसलिए मामले में उनकी भूमिका की गंभीरता से जांच जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।क्या है 3.15 करोड़ रुपये का बोकारो ट्रेजरी घोटाला?
पति ने पत्नी के नाम पर खुलवाया था बैंक खाता, बचाव पक्ष की दलील
राज्य सरकार ने किया अग्रिम जमानत का विरोध














