पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका से और महंगा हुआ कच्चा तेल, 100 डॉलर के करीब पहुंचा बेंट क्रूड
डब्ल्यूटीआई क्रूड ने भी लगाई 91.42 डॉलर प्रति बैरल तक की छलांग
नई
दिल्ली, अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और खाड़ी के
देशों से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय
बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। पश्चिम एशिया में
जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड दो महीने के ऊपरी
स्तर पर पहुंच गया। आज ब्रेंट क्रूड ने तेजी दिखाते हुए 100 डॉलर प्रति
बैरल के स्तर के काफी करीब पहुंच गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट
(डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
अंतरराष्ट्रीय
बाजार में ब्रेंट क्रूड ने आज 1.16 डॉलर प्रति बैरल की उछाल के साथ 95.23
डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग शुरू होने के
बाद इसकी कीमत उछल कर 99.99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो महीने के दौरान ब्रेंट क्रूड का ये सबसे
ऊंचा स्तर है। हालांकि, दिन के कारोबार में इसकी कीमत में मामूली गिरावट भी
आई। भारतीय समय के मुताबिक शाम 6:30 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट
क्रूड 5.64 डॉलर प्रति बैरल यानी 5.99 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.71 डॉलर
प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
दो महीने पहले 24 मई को
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 94.92 डॉलर प्रति बैरल से लेकर 96.30
डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद अमेरिका और ईरान
के बीच शांति होने की उम्मीद की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट का
रुख बन गया था, जिसकी वजह से एक जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंड
क्रड 71.44 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गया था। हालांकि, छह जुलाई के बाद
इसकी कीमत में एक बार फिर तेजी का रुख बन गया।
ब्रेंट क्रूड की तरह
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने आज 0.90 डॉलर प्रति बैरल
की बढ़त के साथ 87.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से आज के कारोबार की शुरुआत
की। थोड़ी देर बाद ही डब्ल्यूटीआई क्रूड उछल कर 91.42 डॉलर प्रति बैरल के
स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, बाद में इसकी कीमत में भी मामूली गिरावट दर्ज
की गई। भारतीय समय के मुताबिक शाम 6:30 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में
डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.32 डॉलर प्रति बैरल यानी 4.98 प्रतिशत की तेजी के साथ
91.15 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
अमेरिका और
ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो जाने, सीजफायर खत्म होने और दोनों देशों
द्वारा एक दूसरे के ठिकानों पर लगातार हमला करने की वजह से कच्चे तेल की
कीमत में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार
में ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर एक महीने के सबसे
ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 81 डॉलर प्रति
बैरल के स्तर के ऊपर चला गया था। इसके बाद तीन दिन तक सुस्ती का माहौल बना
रहा, लेकिन पिछले पांच ट्रेडिंग सेशन से कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर
तेजी का रुख बन गया है, जिसकी वजह से आज इसने पिछले दो महीने के सबसे ऊंचे
स्तर को पार कर लिया है।
जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में
बढ़ रहे तनाव की वजह से एक बार फिर कच्चे तेल की सौ डॉलर के स्तर के ऊपर जा
सकती है। कच्चे तेल की कीमत मे होने वाली बढ़ोतरी भारत जैसे कच्चे तेल के
आयातक देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है। फिनरेक्स
ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना
है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक तेज बनी
रही तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट काफी बढ़ सकता है। इसके साथ ही देश का
इंपोर्ट बिल भी लक्ष्य से काफी अधिक हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की
बढ़ी हुई कीमत के कारण फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) भी
तेज हो सकता है, जिसके कारण भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकती
है।















