14 साल बाद गृह विभाग के बजट पर विधानसभा में चर्चा, 26 हजार पुलिसकर्मियों की होगी भर्ती: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता, पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को 14 वर्षों बाद
पहली बार गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग के बजट पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बजट पर करीब एक घंटे तक जवाब देते हुए
कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने, पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती और
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में अधिकांश वर्षों में गृह विभाग का बजट
बिना चर्चा के ही विधानसभा से पारित कर दिया जाता था। उन्होंने कहा कि
वर्तमान सरकार इस महत्वपूर्ण विभाग से जुड़े हर विषय पर पारदर्शिता और
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने घोषणा की कि
राज्य पुलिस में रिक्त पदों को भरने के लिए 26 हजार नए कांस्टेबलों की
भर्ती की जाएगी। इनमें से 16 हजार पुलिसकर्मियों की नियुक्ति दुर्गापूजा से
पहले कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य पुलिस में कुल एक लाख 21
हजार 344 स्वीकृत पद हैं, जिनमें वर्तमान में 43,073 पद रिक्त हैं। सरकार
का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से सभी रिक्तियां भरकर पुलिस बल को अधिक सक्षम और
आधुनिक बनाना है।
मुख्यमंत्री ने सिविक वॉलंटियर व्यवस्था पर भी
सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान बिना पर्याप्त योग्यता
और प्रशिक्षण के बड़ी संख्या में सिविक वॉलंटियर नियुक्त किए गए। उन्होंने
दावा किया कि इस व्यवस्था का उपयोग राजनीतिक हित साधने और अवैध वसूली के
लिए किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकांश थानों में बुनियादी
सुविधाओं की कमी है, जिसे दूर करने के लिए पुलिस बैरकों, रसोईघरों,
वेतन-भत्तों, स्थानांतरण नीति और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक
सुधार किए जाएंगे, ताकि पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।
भ्रष्टाचार
के खिलाफ सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि
रिश्वत लेने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके
लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि
कोई भी नागरिक केवल एक फोन कॉल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेगा और
शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री
ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के
साथ-साथ पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाना है।














