रांची (RANCHI): छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मर्दापोटी बालक आश्रम में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के छात्र सुभाष कुमेटी (9) की रविवार काे इलाज के दौरान मौत हो गई। जिले में दो दिन में मलेरिया से दो बच्चों की जान जा चुकी है। बीते 10 दिनों में यह तीसरी मौत है, तीनों मृतक स्कूली बच्चे हैं। वहीं छात्रावास के 11 बच्चे पॉजिटिव पाये गये हैं। मलेरिया के मरीज मिलने के बाद कांकेर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को लेकर विभाग अलर्ट मोड पर है। सूचना पर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच कर रही है।
मादा एनोफ़ेलीज़ मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलती है बीमारी
बारिश के मौसम की शुरुवात होते हैं जगह-जगह मछरों का जमावड़ा हो जाता है। ऐसे में लोग को इन्हीं मछरों के काटने से मलेरिया जैसी बीमारी से झूझना पढ़ता है। बता दें कि मलेरिया, प्लाज़्मोडियम पैरासाइट से होने वाली बीमारी है और यह संक्रमित मादा एनोफ़ेलीज़ मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलती है। यह कई उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आम है।
मलेरिया के आम लक्षण
बचाव के तरीके
रोकथाम क्यों महत्वपूर्ण, जानिए
शीघ्र उपचार न मिलने पर मलेरिया गंभीर हो सकता है और एनीमिया, अंग विफलता या मस्तिष्क मलेरिया जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है। शीघ्र निदान और उपचार से रोग से उबरने की संभावना काफी बढ़ जाती है और रोग के प्रसार को कम करने में मदद मिलती है। संक्षेप में बताया जाए तो, मलेरिया से बचाव के सर्वोत्तम तरीके हैं मच्छरों के काटने से बचना, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना, मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले स्प्रे जैसे सुरक्षात्मक उपायों का उपयोग करना और लक्षण दिखने पर शीघ्र चिकित्सा सहायता लेना।















