रांची,  पूर्वांचल आदीवासी कुड़मी समाज और उनके सहयोगी संगठनों के आहवान पर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में महारैली का आयोजन किया। रैली में झारखंड से कुरमी/कुड़मी (महतो) समन्वय समिति झारखंड, बंगाल और ओडिशा के संयोजक लालचन महतो, समन्वय समिति के झारखंड प्रभारी निताई चन्द्र महतो, समन्वय समिति के मिडिया प्रभारी दिलिप कुमार महतो और रेवती महतो चंदनकियारी ने भाग लिया।

रैली में कुरमी/कुड़मी (महतो) समाज की ओर से अनुसूचित जनजाति के सूची में सूचीबद्ध करने और समाज के भाषा को संविधान के आठवीं सूची में सूचिबद्ध करना शामिल है। यह जानकारी कुडमी समाज के लालचन महतो ने गुुरुवार प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

उन्होंने बताया कि रैली के बाद समाज की ओर से आमसभा का आयोजन टेक्सीस्टेन्ट पुरुलिया में की गई। आमसभा की अध्यक्षता बिरबल महतो ने किया। आमसभा में सुनिल कुमार महतो, सुभेन्दु महतो, फटीक चन्द महतो, निवारण चन्द्र महतो सहित छोटानागपुर कुड़मी समाज के नेताओं ने विचार रखा।

आमसभा को कुरमी/कुड़मी (महतो) समन्वय समिति के संयोजक लालचन महतो ने कहा कि छोटानागपुर पठारी भाग में तीन राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा आते हैं। इसमें केवल एक ही राज्य सरकार कुरमी/कुड़मी (महतो) को अनुसुज्ञचित जनजाति की सूची में सूचिबद्ध करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में बंगाल, झारखंड ओर ओडिशा की सरकार को कोई निर्देश नहीं भेजा है। उन्होंने जब-जब चुनाव होता है केंद्र सरकार कुडमी समाज की बातें जोरदार तरीके से उठाती है, लेकिन चुनाव के वह सभी बातें भुल जाती है।

लालचन महतो ने कहा कि झारखंड के विधानसभा चुनाव के समय ही केंद्रीय गृह मंत्री ने कुडमी समाज के भाषा को अन्य भाषाओं के साथ संविधान के आठवीं सूची में सुचिबद्ध करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि उनका सभी लोगों से आग्रह है कि वे अपना व्यक्तिगत स्वार्थ भूल कर समाज के हित में काम करें, तभी उनका संवैधानिक अधिकार मिलेगा।