रांची: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। इसके चलते मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 4.6 फीसदी की तेजी आई और यह 94.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बुधवार के बाद गुरुवार को कीमतों में मामूली नरमी जरूर आई, लेकिन बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

झारखंड में पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी

झारखंड में भी पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को राज्य में पेट्रोल की औसत कीमत करीब ₹106.56 प्रति लीटर रही। वहीं 1 सितंबर को यह करीब ₹105.55 प्रति लीटर थी। यानी दो दिनों में लगभग ₹1.01 प्रति लीटर का अंतर देखने को मिला।

हालांकि, राज्य के अलग-अलग शहरों और पेट्रोल पंपों पर कीमत में कुछ अंतर हो सकता है। रांची में भी स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और तेल कंपनियों की दैनिक मूल्य व्यवस्था के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

डीजल की कीमत पर भी नजर

क्रूड ऑयल महंगा होने का असर डीजल बाजार पर भी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल के मार्जिन में भी तेज उछाल आया है। रॉयटर्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट और रूस में रिफाइनरी व्यवधानों के कारण डीजल बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

झारखंड में डीजल की कीमत भी शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। इसलिए वाहन चालकों को अपने स्थानीय पेट्रोल पंप पर लागू ताजा दर की जांच करनी चाहिए।

क्यों बढ़ रहा है कच्चे तेल का दाम?

मिडिल ईस्ट दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। मौजूदा तनाव में सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ सकती है।

1 सितंबर को अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड चार डॉलर से अधिक चढ़ा था। इसके बाद बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

क्या आने वाले दिनों में और महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार ऊंची बनी रहती है और आपूर्ति पर दबाव बढ़ता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के आधार पर तय नहीं होतीं। तेल कंपनियों की मूल्य नीति, टैक्स, डॉलर-रुपये की विनिमय दर और अन्य लागत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी नजर क्रूड ऑयल और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर है। यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।