गुरु पूर्णिमा पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 51 किलो केसरिया खीर का लगा भोग
रांची, गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री कृष्ण प्रणामी सेवा
धाम की ओर से संचालित पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में
बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ गुरु पूर्णिमा
महोत्सव मनाया गया। परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित
समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरुजनों के प्रति
अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनके चरणों में नमन किया।
महोत्सव का
शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। मंदिर के
पुजारी अरविंद पांडे ने भगवान श्री राधा-कृष्ण की विशेष पूजा संपन्न कराई।
इस अवसर पर भगवान का मनोहारी एवं आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के
लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा-अर्चना के उपरांत भगवान को 51
किलो केसरिया खीर का विशेष भोग अर्पित किया गया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं
के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के
दौरान गुरुजी श्री मंगल दासजी महाराज, श्री श्री 108 संत गुरु राधिका दासजी
महाराज तथा परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज का विधिवत पूजन एवं वंदन किया
गया। श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर उनके बताए आदर्शों और
आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
समारोह के दौरान दीप
प्रज्ज्वलन, सामूहिक आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और
संकीर्तन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। श्रद्धालु देर
तक भजन-कीर्तन में शामिल होकर गुरु भक्ति और भगवान श्री राधा-कृष्ण की
आराधना में लीन रहे।
ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल
और प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में
गुरु को ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का स्रोत माना गया है। गुरु ही
मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं और अज्ञान के अंधकार से ज्ञान
के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु
के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने के साथ-साथ उनके
आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश देता है।
महोत्सव के
समापन पर सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम
में ट्रस्ट के पदाधिकारी, सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में
श्रद्धालु उपस्थित रहे।









