पीओके में इंटरनेट बहाल हो, प्रदर्शनकारियों की मौतों की हो स्वतंत्र जांच : एमनेस्टी इंटरनेशनल
रावलकोट, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में
क्षेत्रीय चुनावों के दौरान प्रदर्शनकारियों की मौत की खबरों के बाद
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से
इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं तत्काल बहाल करने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र एवं
निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि 27 जुलाई को मतदान के पहले दिन रावलकोट में
विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालांकि इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद होने के कारण
वहां से सामने आ रही घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है।
जम्मू-कश्मीर
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जैक) का दावा है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की
फायरिंग में 19 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। वहीं, विभिन्न
मीडिया रिपोर्टों में मौतों की पुष्टि तो की गई है, लेकिन मृतकों की संख्या
को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस ने कहा है कि इस दौरान उसके दो
जवान भी घायल हुए।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक
क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा कि रावलकोट से मिल रही खबरें
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कथित गैर-कानूनी बल
प्रयोग के लंबे इतिहास की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने मांग की कि सुरक्षा
बलों की कार्रवाई की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए।
संगठन
ने यह भी कहा कि जैक पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण चुनाव से पहले तनाव बढ़
गया था। जैक को 5 जून को आजाद कश्मीर के आतंकवाद-रोधी कानून के तहत
प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया था। एमनेस्टी ने सरकार से जैक पर लगाया
गया प्रतिबंध हटाने और उसके सदस्यों एवं समर्थकों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी
कानूनों के इस्तेमाल को बंद करने की मांग की। इसाबेल ने कहा कि किसी संगठन
पर प्रतिबंध को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित जानलेवा बल प्रयोग का आधार
नहीं बनाया जा सकता।










