इस्लामाबाद (पाकिस्तान), संघीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार देररात काबुल कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि तालिबान नेतृत्व अपनी जिम्मेदारी से पीछे भाग रहा है। वह तनावपूर्ण संबंधों के असल कारण यानी अफगानिस्तान से चल रहे आतंकवादियों के ठिकानों को खत्म करने के बजाय इस्लामाबाद की नीतियों को दोष दे रहा है। मंत्रालय ने चेतावनी दी, ''आतंकवाद पर अफगानिस्तान की निष्क्रियता अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।''

द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा, "पाकिस्तान का रुख एकदम साफ है। आतंकवाद अस्वीकार्य है। अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।इस्लामाबाद सीमा पार मौजूद उन आतंकवादी ठिकानों को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हैं।पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैदा होने वाले खतरों को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है, चाहे ये खतरे कहीं से भी आ रहे हों।''

मंत्रालय ने कहा, " इस स्थिति के लिए अफगान तालिबान शासन जिम्मेदार है।'' मंत्रालय ने काबुल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अफगान तालिबान अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता। मंत्रालय ने कहा, "पाकिस्तान की सुरक्षा को अफगान तालिबान की निष्क्रियता, टालमटोल या गलत प्राथमिकताओं का बंधक नहीं बनने दिया जाएगा।" यह ताजा बयान इस्लामाबाद और काबुल के बीच चल रहे तनाव के बीच आया है।

'पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज' के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में पाकिस्तान में 225 आतंकी हमले हुए। पिछले 12 साल में किसी एक महीने में हुए हमलों की यह सबसे बड़ी संख्या है। राजनयिक बातचीत और मध्यस्थता की कोशिश के बावजूद यह मुद्दा अभी भी विवाद की बड़ी वजह बना हुआ है। सितंबर में, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि काबुल, इस्लामाबाद के साथ बातचीत और सहयोग जारी रखना चाहता है। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए चरमपंथी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई जरूरी है।

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