नई दिल्ली, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के स्पेशल जज अजय गुप्ता ने 18 नवंबर को फैसला सुनाने का आदेश दिया।

न्यायालय ने गुरुवार को इस मामले के 14वें आरोपित शेषराव बजरंग सूर्यवंशी की ओर से आरोप तय करने पर दलीलें सुनी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 14 अक्टूबर को शेषराव बजरंग सूर्यवंशी उर्फ राज सूर्यवंशी के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरोपित धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने धनंजय लोखंडे पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाने का आदेश दिया था।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 22 अगस्त को धनंजय लोखंडे की अरेस्ट मेमो देने की मांग करने वाली अर्जी खारिज कर दी थी। इसके पहले न्यायालय ने 14 अगस्त को सीबीआई को इस मामले की आगे और जांच करने की अनुमति दी थी। 12 अगस्त को न्यायालय ने सीबीआई की ओर से 13 आरोपितों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। सीबीआई ने यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार को आरोपित बनाया है।

सीबीआई ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238, 303(2), भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) और 13(1 (ए) और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट की धारा 10 ,धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। चार्जशीट पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कहा गया था कि इस मामले में 12 मई को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके तुरंत बाद 72 अफसरों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरु की गई। सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और दूसरे राज्यों के 92 स्थानों पर छापे मारे थे। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को की गई थी।