खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन को पेशावर हाई कोर्ट में चुनौती, 20 अक्टूबर को सुनवाई
पेशावर (खैबर पख्तूनख्वा) पाकिस्तान, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने पेशावर उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय पीटीआई की याचिका पर 20 अक्टूबर को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। पीटीआई चेयरमैन बैरिस्टर गोहर खान और वकील सलमान खान ने संघीय सरकार के खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन के खिलाफ दो याचिकाएं दायर की हैं। 
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत मंजूरी दिए जाने के बाद 11 अक्टूबर को प्रांत में आपातकाल लागू किया गया था। इसके लिए संघीय सरकार ने प्रांत की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद विरोधी प्रयासों को लेकर चिंताओं का हवाला दिया। अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान पीटीआई के संस्थापक हैं। संघीय सरकार के कदमों से पहले प्रांत में पीटीआई की सरकार थी।
संघीय सरकार की छाया में राज्यपाल फैसल करीम कुंडी ने प्रांत का कामकाज संभाल लिया है। इसमें 11 सदस्यीय 'टेक्नोक्रेटिक केपी सलाहकार परिषद' उनकी मदद कर रही है। एक दिन पहले ही संसद ने एक संयुक्त सत्र के दौरान खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू करने को मंजूरी दी। इसके बाद विपक्षी गठबंधन टीटीएपी ने इस कारण केंद्र सरकार के साथ बातचीत खत्म करने की घोषणा की। संसदीयमंत्री तारिक फजल चौधरी के प्रस्तावों को संसद की संयुक्त बैठक में पारित कर दिया गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत 11 अक्टूबर को जारी राष्ट्रपति की उद्घोषणा को मंजूरी दिलाना था। यह प्रस्ताव सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी बहस के बाद पारित किया गया।
पीटीआई की याचिका में पेशावर उच्च न्यायालय से आपातकाल और राज्यपाल शासन को असंवैधानिक घोषित करने और उन्हें रद्द करने का आग्रह किया गया है। यह याचिका वकील अली जमान के माध्यम से दायर की गई है। पीटीआई ने तर्क दिया कि आतंकवाद को आधार बनाकर एक निर्वाचित प्रांतीय सरकार की शक्तियों को सीमित करना भेदभावपूर्ण व्यवहार है। पार्टी का कहना है कि संघीय सरकार राजनीतिक मतभेदों के आधार पर प्रांतीय प्रशासन से उसकी शक्तियां नहीं छीन सकती।
याचिका में बलोचिस्तान का उदाहरण दिया गया, जहां आतंकवाद और जान-माल के नुकसान के बावजूद राज्यपाल शासन लागू नहीं किया गया था। साथ ही, 2007 से 2015 के बीच खैबर पख्तूनख्वा का भी जिक्र किया गया। इन उदाहरणों के जरिए तर्क दिया गया कि मौजूदा प्रांतीय सरकार के खिलाफ उठाए गए कदम भेदभावपूर्ण हैं। पार्टी ने कहा कि वह आतंकवाद विरोधी अभियानों और प्रांत में शांति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन उसने आरोप लगाया कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करने के आरोपों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
पार्टी ने कहा कि 2024 के चुनाव में पीटीआई ने खैबर पख्तूनख्वा में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। याचिका में तर्क दिया गया है कि राज्यपाल शासन लगाने के लिए अनुच्छेद 234 में निर्धारित संवैधानिक जरूरत और प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है। पीटीआई ने कहा कि उसके इस्लामाबाद 'लॉन्ग मार्च' के दौरान कोई भी गैरकानूनी कदम उठाने की योजना नहीं थी।














