धनबाद,   दुर्गा पूजा के पंडालों में जहां आमतौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक थीम देखने को मिलती है, वहीं आईआईटी (आईएसएम) धनबाद इस बार आस्था के साथ विज्ञान और तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है। संस्थान के दुर्गा पूजा पंडाल की थीम क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर पर आधारित है। इसके माध्यम से आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहनों, स्वच्छ ऊर्जा और भारत के तकनीकी भविष्य में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित किया जा रहा है। पंडाल में ‘स्मॉलर चिप्स, बिगर टुमॉरोज’ और ‘क्रिटिकल मिनरल्स फॉर अ क्लीनर, ग्रीनर फ्यूचर’ जैसे संदेशों के जरिए भविष्य की तकनीक और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाने का प्रयास किया गया है।

पंडाल की आकर्षक सजावट में लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को चमकदार क्रिस्टल के स्वरूप में प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ सेमीकंडक्टर चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की डिजाइन भी तैयार की गई है। इन कलात्मक संरचनाओं के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी आधुनिक तकनीकों के विकास में इन खनिजों और सेमीकंडक्टर की कितनी अहम भूमिका है। इस तरह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ विज्ञान और तकनीकी नवाचार के प्रति जागरूकता का माध्यम भी बनेगा।

क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर की थीम संस्थान में चल रहे शोध और तकनीकी विकास से भी जुड़ी है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्रिटिकल मिनरल्स (कोर-मिन) को अगस्त 2025 में मान्यता मिली थी। इसका उद्घाटन केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 23 दिसंबर 2025 को किया था।

संस्थान में इंडिया-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी का सैटेलाइट कैंपस भी संचालित है, जो टेक्समिन और यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के सहयोग से काम करता है। इसके अतिरिक्त, संस्थान की टीम द्वारा विकसित स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई थी। ऐसे में इस वर्ष की पूजा थीम संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों और देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे प्रयासों को भी रेखांकित करती है।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में सामुदायिक दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1977 में तत्कालीन निदेशक प्रो. जी.एस. मरवाह के कार्यकाल में हुई थी। तब से यह आयोजन संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और उनके परिवारों को एक साथ जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परंपरा बना हुआ है। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ सामाजिक एकजुटता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी मंच बन गया है।

संस्थान के निदेशक एवं पूजा आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष का पंडाल सांस्कृतिक परंपराओं को उन तकनीकों से जोड़ता है, जो भारत की प्रगति और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं डीन (फैकल्टी) प्रो. एम.के. सिंह ने इसे विज्ञान, शोध और नवाचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास बताया।

वहीं, रजिस्ट्रार प्रबोध पांडेय ने कहा कि यह आयोजन कैंपस में एकजुटता मजबूत करने के साथ उत्सव को शैक्षणिक आयाम भी प्रदान करता है। समिति के महासचिव एवं ज्वाइंट रजिस्ट्रार रंति देव शर्मा ने इसे सामूहिक प्रयास का प्रतीक बताया। जनसंपर्क पदाधिकारी मृत्युजंय शर्मा के अनुसार, पंडाल के रचनात्मक डिजाइन के जरिए जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

कुल मिलाकर, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद का यह दुर्गा पूजा पंडाल परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनकर उभर रहा है। यहां मां दुर्गा की आराधना के साथ क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत के भविष्य की झलक भी देखने को मिलेगी।