धनबाद,   धनबाद में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफटी की बैठक में 2,536 नई योजनाओं के अनुमोदन का प्रस्ताव रखा गया। उपायुक्त आदित्य रंजन ने भरोसा दिलाया कि अगले तीन से छह महीने में विकास योजनाओं के परिणाम धरातल पर नजर आने लगेंगे। वहीं निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने चापाकल मरम्मत के कार्यों का हिसाब मांगा, तो टुंडी और सिंदरी विधायकों ने सड़क, शिक्षा, सिंचाई और पेयजल से जुड़ी समस्याएं उठाईं।

समाहरणालय स्थित बहुउद्देशीय प्रशिक्षण केंद्र में उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक हुई। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की गई।


                          

उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन पारदर्शिता के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। जमीन विवाद या स्थानीय समस्याओं के कारण विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता में कमी की शिकायत मिलने पर दो से तीन दिनों के भीतर जांच कराने का भरोसा भी दिया। जिले के 140 विद्यालयों को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर विकसित करने और प्रत्येक पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

विधायक अरूप चटर्जी ने डीएमएफटी फंड से जिले में करीब 10 हजार चापाकलों की मरम्मत के कार्यों का लेखा-जोखा मांगा। उन्होंने कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने अंडरग्राउंड ड्रेनेज, मोबाइल हेल्थ एंबुलेंस और मैथन-पंचेत में इको टूरिज्म पार्क विकसित करने का भी सुझाव दिया।

टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने ब्राह्मणडीह-खरियो सड़क की मरम्मत, पोखरिया में गार्ड वॉल निर्माण और ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की।

वहीं सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने स्कूलों, गोविंदपुर लाइब्रेरी और सोलर आधारित सिंचाई व्यवस्था में सुधार की बात रखी। खुदिया नदी से जलापूर्ति का मुद्दा भी उठाया।

प्रशासन के अनुसार, 2,536 प्रस्तावित योजनाओं में 70 प्रतिशत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और 30 प्रतिशत आधारभूत संरचना पर खर्च करने की रूपरेखा है। अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर सबकी नजरें रहेंगी।