फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
कानपुर, किदवई नगर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने उनके कब्जे से फर्जी दस्तावेज, नकली मोहरें, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किया है। गिरोह विभिन्न विश्वविद्यालयों और बोर्डों के नाम पर हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्री और अंकपत्र तैयार कर लोगों को उपलब्ध कराता था।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार लोगों की पहचान मनीष कुमार उर्फ रवि निवासी नौबस्ता और अर्जुन यादव निवासी किदवई नगर के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से जुड़े थे।
जांच में सामने आया कि गिरोह बिना परीक्षा दिलाए इंटरमीडिएट, स्नातक, स्नातकोत्तर, विधि और फार्मेसी पाठ्यक्रमों की फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराता था। पुलिस के मुताबिक आरोपित विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी अंकपत्र, ग्रेड शीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करते थे। गिरोह द्वारा करीब 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। तेलंगाना यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों के नाम का दुरुपयोग किया गया।
पुलिस ने मौके से विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संबंधित फर्जी मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, नकली मोहरें, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में करोड़ों रुपये के लेनदेन के सुराग भी मिले हैं।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह “ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड यूके लंदन” के नाम पर कथित अवॉर्ड कार्यक्रम आयोजित करता था। इस कार्यक्रम के जरिए कई सेलिब्रिटीज को अवॉर्ड देने का दावा कर प्रचार-प्रसार किया जाता था। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपित मनीष ने दुबई यात्रा करने की बात भी स्वीकार की है। पुलिस ने बताया कि मनीष पूर्व में भी जेल जा चुका है और उसके खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।















