ढाका (बांग्लादेश),  देश की राजधानी के मीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में कपड़ा उद्योग के कर्मचारियों की 30,000 टका न्यूनतम वेतन करने की मांग को लेकर तीन दिन से चल रहा आंदोलन मंगलवार को हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और पुलिस के बीच दिनभर तीखी झड़पें हुईं। शाम होते-होते धरपकड़ शुरू हो गई। पुलिस का कहना है कि इन झड़पों में 100 लोग घायल हुए हैं। घायलों में पुलिस कर्मचारी भी हैं। अशांति फैलाने के आरोप में 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, कपड़ा उद्योग कर्मचारियों और मजदूरों ने सरकार के आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक उकसावे या बड़ी साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि किसी बाहरी प्रभाव के कारण नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई के चलते वे विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हुए हैं। पुलिस ने अशांति भड़काने के आरोप में देररात 40 लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। पुलिस ने दावा किया है कि प्रदर्शन में बाहरी लोग शामिल हो गए हैं।

प्रदर्शनकारी शोएब इस्लाम ने कहा कि तोड़फोड़ या हिंसा में मजदूरों की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, "हम मजदूर किसी भी तरह की तोड़फोड़ में शामिल नहीं हैं। अगर कोई ऐसा करता है, तो यह पुलिस का काम है कि वह इस पर कार्रवाई करे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बिना किसी वजह के हमला किया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके साथियों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जाता है, तो मजदूर इसका विरोध करेंगे। एक अन्य मजदूर शेफली बेगम ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि इन प्रदर्शनों के पीछे बाहरी समूहों का हाथ है। उन्होंने कहा, "हमें किसी ने उकसाया नहीं है। हम अपनी जायज मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।"

प्रदर्शनकारी शमीम ने कहा कि अगर सरकार मांगी गई न्यूनतम वेतन राशि की घोषणा कर दे, तो ये प्रदर्शन तुरंत खत्म हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "अगर सरकार 30,000 टका न्यूनतम वेतन की घोषणा कर देती है, तो सभी मजदूर अपनी फैक्ट्रियों में लौट जाएंगे और कोई भी सड़क पर नहीं रहेगा।" वहीं, कानून लागू करने वाले अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनों में ऐसे लोग घुस आए हैं, जिनका मजदूरों की वेतन मांगों से कोई लेना-देना नहीं है।

ढाका रेंज के डीआईजी मो. मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि ढाका, मीरपुर, गाजीपुर और नारायणगंज में हुई अशांति के सिलसिले में पुलिस ने 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से कोई भी कपड़ा कारखाने का मजदूर नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस सबूत जुटा रही है ताकि हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

ढाका जिला पुलिस अधीक्षक शमीमा परवीन ने यह भी आरोप लगाया कि बुरका और हेलमेट पहने कुछ लोग देश को अस्थिर करने की कोशिश में मजदूरों को उकसा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस के पास इन गतिविधियों की फंडिंग के बारे में जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसके समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया। इस बीच, मीरपुर डिवीजन के उपायुक्त हसन मोहम्मद नाशेर रिकबदार ने उन लोगों के इरादों पर सवाल उठाया, जो वेतन बोर्ड (वेज बोर्ड) के गठन के बावजूद प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जो लोग अभी प्रदर्शन कर रहे हैं, वे मजदूर नहीं हैं। सरकार ने मजदूरों के वेतन में वृद्धि के लिए पहले ही एक बोर्ड बना दिया है और उनका वेतन निश्चित रूप से बढ़ेगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आंदोलन नहीं रुकता तो पुलिस हर किसी के भी खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

बड़ी खबर