अमेरिका-ईरान को मनाने में जुटे कतर, सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान, ट्रंप ने हमले को टाला
वाशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद , दुनिया के प्रमुख और सबसे अहम तेलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर खिंची तनाव की तलवारों के बीच कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और पाकिस्तान 'अमेरिका और ईरान' के बीच शांति समझौता कराने के प्रयासों पर लगे हुए हैं। मध्यस्थ की भूमिका में विफलता के बावजूद पाकिस्तान ने हार नहीं मानी है।
अरबी चैनल अल जजीरा, अमेरिकी चैनल सीबीएस न्यूज और पाकिस्तान के चैनल दुनिया न्यूज की रिपोर्ट में ईरान-अमेरिका के मध्य छिड़े विवाद की सुर्खियों को विस्तार से तरजीह दी गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अनुरोध पर ईरान पर होने वाले नियोजित हमले को टाल दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर अपनी मुख्य शर्त पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को हर हाल में अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा। साथ ही कुछ नरमी दिखाते हुए कहा कि अगर पश्चिम एशिया के सहयोगी देश संतुष्ट हो जाते हैं तो अमेरिका को कोई दिक्कत नहीं है। ट्रंप ने कहा कि इसलिए अमेरिका अब मंगलवार को ईरान पर हमला नहीं करेगा। ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिका और मध्य-पूर्व के देशों को स्वीकार्य होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा से पहले ईरान ने कहा था कि उसने संभावित शांति समझौते के लिए शर्तों का एक और संशोधित मसौदा भेजा है। बताया जा रहा है कि यह मसौदा पाकिस्तान के जरिये के भेजा गया है। ट्रंप के बयान पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा, " यह ध्यान रखा जाए कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है। तेहरान गरिमा, अधिकार और राष्ट्र के अधिकारों की रक्षा के साथ इस बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हुआ है।
उधर, पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान पहुंचकर ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। तेहरान में 16 मई से मौजूद नकवी ने बीते कल वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कीं। वह ईरानी राष्ट्रपति, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ़ और गृहमंत्री एस्कंदर मोमेनी से मिल चुके हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि इस्लामी देशों के बीच तालमेल और एकजुटता ही टिकाऊ शांति और स्थिरता की नींव बन सकती है।















