पटना,  बिहार में भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में गुरुवार को पटना उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार झा ने दिया। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी, वायरलेस लॉगबुक, मोबाइल फोन का डाटा सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 28 अगस्त काे हाेगी।

याचिकाकर्ता आशा देवी के अधिवक्ता अमित कुमार ने कोर्ट से 17 जून को हुए एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और तय समय सीमा के भीतर कानून के तहत जांच करने मांग की। साथ ही घटना के दिन का सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी, वायरलेस लॉगबुक, स्टेशन डायरी इंट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बॉडी कैमरा फुटेज, सीजर रिकॉर्ड, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सुरक्षित करने की गुहार लगाई है।

अधिवक्ता ने काेर्ट से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इंकवेस्ट रिपोर्ट और फोरेंसिक रिपोर्ट की प्रति आवेदिका को देने साथ में मृतक का मोबाइल फोन और उसके पास से जब्त सभी सामान वापस देने का निर्देश देने की मांग की। उन्होंने बताया कि 16/ 17 जून की रात बिना बताए याचिकाकर्ता के घर में बगैर महिला सिपाही के प्रवेश किया, जिसकी जांच करने की मांग की। इसके अलावा 17 जून को आशा देवी के पति काशीनाथ तिवारी को शाहपुर थाना में रखा गया।

उल्लेखनीय है कि, भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस ने मुठभेड़ के नाम पर युवक भरत भूषण तिवारी को गोली मार दी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि भरत ने जब हथियार फेंक दिया, तब पुलिस ने उसे गोली मारी। हालांकि, इस मामले में आयाेग की तरफ से न्यायिक जांच चल रही है।