भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, कहा- कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा
संयुक्त
राष्ट्र, भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि का
निलंबित किये जाने को न्यायोचित ठहराया है और कहा है कि पाकिस्तान ने दशकों
तक भारत के खिलाफ आतंकवाद को राज्य की नीति में पोषित कर सिंधु जल संधि की
बुनियादी भावना को ही खत्म कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा
परिषद (यूएनएससी) में आयोजित "प्राकृतिक संसाधनों का शासन: शांति, सुरक्षा
एवं समृद्धि की बुनियाद" विषय पर उच्च स्तरीय खुली बहस के दौरान भारत के
स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान पर सीमा-पार आतंकवाद को
बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सिंधु जल संधि पर देश का सख्त रुख दोहराया।
हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का
दुरुपयोग करते हुए "झूठी कहानी" पेश करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट
कहा कि सीमा-पार आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में अपनाने वाले देश के
साथ आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित सहयोग संभव नहीं है। उन्होंने कहा
कि सिंधु जल संधि को पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन देने से
अलग करके नहीं देखा जा सकता।
राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। यह
संवैधानिक और कानूनी सच्चाई है जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नज़रअंदाज़ करना
चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा एकमात्र लंबित
मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है और भारत पर उंगली
उठाने के बजाय, पाकिस्तान अपने घर को ठीक करके अपना और अपने लोगों का
ज़्यादा भला करेगा।
भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के
पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद 23
अप्रैल को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति (सीसीएस) की बैठक
में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। भारत ने दो टूक शब्दों
में कहा था कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और
स्थायी रूप से सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता।
भारत सरकार ने नई दिल्ली में साफ किया है कि अपने निवर्तमान रूप में सिंधु
जल संधि फिर से काम नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संधि में रहना
भारत के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा, "भारत ने यह संधि नुकसान
उठा कर भी सद्भावना और मैत्री की भावना से की थी लेकिन चार दशकों से
सीमापार आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में निर्लज्जता से बढ़ा कर
पाकिस्तान ने संधि में वर्णित सद्भावना का उल्लंघन किया है। संधि की नींव
को ध्वस्त कर दिया गया है।"
भारत का कहना है कि जहां उसने युद्धों
के दौरान भी छह दशकों से अधिक समय तक संधि का सम्मान किया, वहीं पाकिस्तान
के निरंतर सीमा पार आतंकवाद (संसद, मुंबई, उरी, पुलवामा और पहलगाम पर हमलों
सहित) ने संधि के लिए आवश्यक आपसी विश्वास और पारस्परिकता को पूरी तरह से
नष्ट कर दिया है।
भारत का मानना है कि जिन परिस्थितियों में वर्ष
1960 में यह संधि हुई थी, वे अब पूरी तरह बदल चुकी हैं। सूत्रों ने कहा कि
मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, आतंकवाद का, राज्य की नीति के रूप में
प्रयोग खुद ही एक उल्लंघन है। भविष्य में यदि कोई भी समझौता या बातचीत की
जाती है, तो वह आज की वास्तविकताओं जैसे जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर
रिट्रीट, स्थानांतरण जल विज्ञान, बढ़ती मांग, नई तकनीक और सुरक्षा चिंताओं
को प्रतिबिंबित करेगी।
पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर
अंतरराष्ट्रीय प्रयासों पर भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि में विवाद
समाधान की स्पष्ट प्रक्रिया तय है, जिसकी शुरुआत के दो स्तर द्विपक्षीय
आधिकारिक स्तर की बातचीत से होती है, उसके बाद तटस्थ विशेषज्ञ और अंत में
आवश्यकता होने पर मध्यस्थता न्यायालय का विकल्प आता है। सूत्रों के
मुताबिक, पाकिस्तान ने सीधे मध्यस्थता न्यायालय का रुख अपनाकर संधि के
प्रावधानों का उल्लंघन किया। भारत ने दोहराया कि यह न्यायालय "गैर-कानूनी
तरीके से गठित" किया गया था और इसका निर्णय भारत के लिए बाध्यकारी नहीं
हैं।
भारत का आरोप है कि भारत सरकार ने वर्ष 2023 में पाकिस्तान से
बदलती परिस्थितियों - बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा आवश्यकताओं और
आधुनिक तकनीक को देखते हुए संधि की समीक्षा और आधुनिकीकरण का प्रस्ताव रखा
था। लेकिन पाकिस्तान ने इस पर बातचीत से लगातार इनकार करता रहा। सूत्रों ने
कहा कि यह संधि 1950 के दशक की परिस्थितियों और तकनीक पर आधारित थी, जबकि
आज जल संसाधनों की जरूरतें और चुनौतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
भारत
के अनुसार, संधि के निलंबन के दौरान स्थायी सिंधु आयोग की बैठकें नहीं
होंगी, नियमित निरीक्षण बंद रहेंगे, हाइड्रोलॉजिकल और परियोजनाओं से जुड़े
डेटा का नियमित आदान-प्रदान नहीं होगा। हालांकि, मानवीय आधार पर पाकिस्तान
को बाढ़ संबंधी चेतावनियां जारी करना जारी रहेगा। पिछले बाढ़ सीजन में
भारत ने स्वेच्छा से 23 बाढ़ चेतावनियां साझा की थीं।
इसके अलावा,
भारत का कहना है कि वह सिंधु जल के पूर्ण उपयोग के साथ आगे बढ़ रहा है। दो
प्रमुख परियोजनाएं, 624 मेगावाट कीरू और 1000 मेगावाट की पाकल दुल पनबिजली
संयंत्र, इस साल चालू होने वाली हैं। भारत आने वाले वर्षों में जम्मू और
कश्मीर में और 5500 मेगावाट जोड़ने की योजना बना रहा है। प्रमुख जलविद्युत
परियोजनाओं में सावलकोट जलविद्युत परियोजना (1,856 मेगावाट), पाकल दुल
परियोजना (1,000 मेगावाट), रातले परियोजना (850 मेगावाट), किरू परियोजना
(624 मेगावाट), क्वार परियोजना (540 मेगावाट) शामिल हैं।
इसके
अलावा, भारत सलाल और बगलिहार जैसी परियोजनाओं में गाद हटाने (सेडिमेंट
फ्लशिंग) और जलाशय प्रबंधन का काम करेगा ताकि भंडारण क्षमता को बहाल किया
जा सके, बांध की सुरक्षा बेहतर हो और जलविद्युत दक्षता बढ़ाई जा सके। ये
उपाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत इंजीनियरिंग प्रक्रियाएं हैं, न कि नदी
के बहाव को बदलने की कोशिशें।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान की जल
संबंधी चुनौतियां मुख्य रूप से अपर्याप्त जल भंडारण, पुरानी सिंचाई
व्यवस्था और जल संसाधनों के अक्षम उपयोग के कारण हैं, न कि भारत की
अपस्ट्रीम परियोजनाओं की वजह से।
भारत ने दोहराया कि संधि के निलंबन
के दौरान वह सिंधु नदी प्रणाली में वैज्ञानिक बेसिन प्रबंधन, बुनियादी
ढांचे के आधुनिकीकरण, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जल सुरक्षा को मजबूत करने के
माध्यम से सिंधु जल में भारत के वैध हिस्से के इष्टतम उपयोग पर ध्यान
केंद्रित किया जाएगा।















